Friday, December 9, 2022
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प्रो. मार्शल की परिभाषा | विशेषताएँ | दोष | Marshal ki paribhasha | आलोचनाएँ |

मार्शल 

मार्शल ने अपनी पुस्तक में अर्थशास्त्र की परिभाषा देते हुए लिखा है “शाजनैतिक अर्थव्यवस्था या अर्थशास्त्र जीवन के साधारण व्यवसाय के सम्बन्ध में मानव जाति का अध्ययन है, यह व्यक्तिगत एवं सामाजिक क्रियाओं के उस भाग का परीक्षण करता है जिसका विशेष सम्बन्ध जीवन में भौतिक कल्याण अधवा सुख से सम्बन्धित पदार्थों की प्राप्ति एवं उपयोग है।

 मार्शल के अनुसार अर्थशास्त्र एक ओर तो धन का अध्ययन है तथा दूसरी ओर उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण यह मानव के अध्ययन का एक भाग है। 

प्रो. मार्शल की परिभाषा की विशेषताएँ या गुण/व्याख्या

प्रो, मार्शल की परिभाषा में निम्नलिखित विशेषताएँ निहित हैं

  1. स्पष्ट तथा सरलमार्शल की परिभाषा स्पष्ट एवं सरल है। अर्थशास्त्र में मनुष्य एवं धन दोनों का अध्ययन किया जाता है। यह बात आसानी से समझ में आ जाती है।

“2, अर्थशास्त्र मानव जीवन के साधारण व्यवसाय से सम्बन्ध रखता हैमनुष्य जीविकोपार्जन हेतु जो सामान्य आर्थिक प्रयत्न करता है, उनका ही अध्ययन अर्थशास्त्र में किया जाता है। साधारण शब्दों में वे आर्थिक क्रियाएँ जो उपभोग, उत्पत्ति, विनिमय, बितरण से सम्बन्ध रखती हैं, अर्थशास्त्र के अध्ययन की विषय सामग्री है।

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  1. अर्थशास्त्र का उद्देश्य भौतिक कल्याण में वृद्धि करमा हैमार्शल के अनुसार, अर्थशास्त्र में मानव कल्याण या भौतिक कल्याण का अध्ययन किया जाता है। भौतिक कल्याण द्वारा कुल कल्याण में वृद्धि होती है। इस प्रकार के विचार प्रकट कर मार्शल ने “कल्याणकारी अर्थशास्त्र” की पृष्ठभूमि तैयार कर दी तथा पीगू ने मार्शल के इस विचार को गति प्रदान की है।
  2. अर्थशास्त्र भनुष्य एवं धन दोनों का अध्ययन करता हैमार्शल के अनुसार, अर्थशास्त्र एक ओर घन का अध्ययन है और दूसरी ओर जो उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण मनुष्य के अध्ययन का एक भाग है। इस प्रकार अर्थशास्त्र में मनुष्य को प्रथम स्थान तथा धन को द्वितीय स्थान दियां गया है। धन का अध्ययन आर्थिक कल्याण के साधन के रूप में किया जाता है। इसलिए मनुष्य का आर्थिक कल्याण अर्थशास्त्र के अध्ययन का मुख्य उद्देश्य माना गया है।

 

व्यक्तिगत एवं सामाजिक क्रियाओं का अध्ययन हैअर्थशास्त्र में मनुष्य की व्यक्तिगत रूप से की गई क्रियाओं के अध्ययन के साथ समाज के अंग के रूप में की गई क्रियाओं का भी अध्ययन किया जाकर है।

 

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  1. आर्थिक एवं अनार्थिक क्रियाओं में भेदमार्शल ने मनुष्य की क्रियाओं को दो भागों में विभकत किया है आर्थिक तथा अनार्थिक। आर्थिक क्रियाएँ वे हैं, जो धन कमाने से सम्बन्धित हैं। अनार्थिक क्रियाओं से आशय ऐसी क्रियाओं से है जो धन कमाने से कोई सम्बन्ध नहीं रखती हैं उदाहरण के लिए माता द्वारा बच्चे का पालन पोषण, धार्मिक कार्य, राजनैतिक कार्य आदि को मुद्रा के द्वारा नहीं मापा जा सकता है, इसलिए इन्हें अनार्थिक क्रियाएँ कहते हैं। अर्थशास्त्र में ऐसी अनार्थिक क्रियाओं का अध्ययन नहीं किया बाता है।

 

  1. मुद्रा को भौतिक कल्याण का मापक माना हैमार्शल ने भौतिक कल्याण क्‍या है तथा इसे कैसे मापा जा सकता है | ऐला कहीं स्पष्ट नहीं किया है फिर भी एक स्थान पर यह उल्लेख कर दिया है कि भौतिक कल्याण मानव कल्याण का एक भाग है जिसे मुद्रा में मापा जा सकता है।

प्रो, मार्शल की परिभाषा के दोष या आलोचनाएँ –

मार्शल की परिभाषा का सन्‌ 1932 तक बहुत अधिक प्रभाव रहा, किन्तु 1934 में रॉबिन्स की पुस्तक आर्थिक विज्ञान की प्रकृति एवं महत्व प्रकाशित हुई जिसमें मार्शल की परिभाषा की  आलोचना की गई। प्रो.जे,के.मेहता ने भी इस परिभाषा में कई दोष बताए। . 

मार्शल की परिभाषा की कुछ प्रमुख आलोचनाएँ या दोष निम्न प्रकार हैं.

  1. संकुचित परिभाषा मार्शल ने अनार्थिक, अभौतिक और असामाजिक क्रियाओं को अर्थशास्त्र की सीमाओं से बाहर रहकर अर्थशास्त्र का क्षेत्र संकुचित बना दिया है। अर्थशास्त्र एक मानव  शास्त्र है जिसमें मनुष्य की समस्त प्रकार की क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। यदि मुद्रा के मापदण्ड से आर्थिक क्रियाओं को मापा गया तो वस्तु विनिमय की क्रियाएँ अर्थशास्त्र के क्षेत्र से बाहर चली जाएगी।

2, आर्थिक तथा गैर आर्थिक क्रियाओं का वर्गीकरण अवैज्ञानिकमार्शल ने आर्थिक तथा गैर आर्थिक क्रियाओं का जो भेद किया है वह उचित नहीं | विशेष परिस्थितियीं में कोई भी आर्थिक क्रिया गैर आर्थिक भी बन सकती है। रॉबिन्स के कथनानुसार मानव की क्रियाओं को इस प्रकार बाँटना अनुचित एवं अवैज्ञानिक है। आर्थिक क्रियाओं का आधार वास्तव में दुर्लभता है, मुद्रा का मापदण्ड नहीं |

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  1. ‘जीवन के साधारण व्यवसाय ‘ वाक्यांश अस्पष्ट एवं भ्रामक हैरॉबिन्स का कथन है कि मार्शल द्वारा प्रयुक्त जीवन के साधारण व्यवसाय का अर्थ अस्पष्ट एवं भ्रामक है, क्योंकि साधारण व्यवसाय में कौन-सी क्रियाएँ साधारण हैं और कौन-कौन-सी क्रियाएँ असाधारण हैं, उचित रूप से अन्तर नहीं किया जां सकता है। अर्थशास्त्र में जो क्रियाएँ मानवीय आवश्यकताओं को सन्तुष्ट कर सके उन सब क्रियाओं को चाहे वे साधारण हो या असाधारण, सम्मिलित करना चाहिए।
  2. अर्थशास्त्र को केवल सामाजिक विज्ञान कहना उचित नहींमार्शल के आलोचकों ने अर्थशास्त्र को मानव विज्ञान कहा है। मानव विज्ञान मानव मात्र का अध्ययन करता है। चाहे वह समाज में हो या समाज के बाहर।

 

  1. मार्शल की परिभाषा भौतिकता के जाल में फँसी हैप्रो. रॉबिन्स का मत है कि मार्शल की परिभाषा भौतिकता के जाल में फँसी हुई है। उनके मतानुसार मानव कल्याण न केवल भौतिक अपितु अभौतिक साधनों पर भी निर्भर करता है। देश प्रेम की भावना, सुमधुर संगीत आदि भी मानवीय कल्याण में वृद्धि करते हैं, किन्तु भौतिक न होने के कारण मार्शल के अनुसार उनका अर्थशास्त्र में कोई महत्व नहीं है। राबिन्स के मतानुसार जो वस्तुएँ सीमित हों और जिनसे उपयोगिता प्राप्त होती है उन्हें अर्थशास्त्र में अवश्य स्थान दिया जाना चाहिए।

 

  1. सभी आर्थिक क्रियाएँ कल्याण में वृद्धि नहीं करती हैंप्रो. रॉबिन्स के अनुसार अर्थशास्त्र का कल्याण. से कोई सम्बन्ध नहीं है। मुद्रा रूपी मापदण्ड मानव कल्याण को उचित रूप से नहीं आँक सकता | कई आर्थिक क्रियाएँ मानव कल्याण,में वृद्धि के स्थान पर कमी करती हैं जैसे मादक पदार्थ शराब का सेवन आदि।

 

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  1. अर्थशास्त्र को तटस्थ विज्ञान न माननाप्रो.रॉबिन्स के अनुसार, अर्थशास्त्र अच्छाई तथा बुराई के बारे में निर्णय नहीं करता है। वह तो तटस्थ विज्ञान है। अर्थशास्त्र को एक वास्तविक विज्ञान कहना उपयुक्त होगा। यदि इसे भौतिक कल्याण या आदर्श विज्ञान मान लिया जाये तो यह एक प्रकार से नीतिशास्त्र बन जायेगा।

 

  1. केवल सामाजिक मनुष्यों का अध्ययन ही न्‍्यायोचित नहीं हैप्रो, मार्शल के अनुसार अर्थशास्त्र में केवल समाज में रहने वाले व्यक्तियों का ही अध्ययन किया जाता है। इसमें एकान्त वास कर रहे साधु संन्यासियों की आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन नहीं किया जाता है। 

प्रो. रॉबिन्स इस विचार को उचित नहीं मानते हैं। ह इस प्रकार प्रो, मार्शल की परिभाषा की काफी आलोचना की गई है, किन्तु हमें यह स्वीकार करना होगा कि मार्शल की परिभाषा एक व्यवहारिक परिभाषा है। उन्होंने मनुष्य को प्रधानता दी है। मार्शल ने प्राचीन अर्थशास्त्रियों द्वारा दी गई परिभाषाओं में महत्त्वपूर्ण सुधार किया है। इस कारण व्यवहारिक दृष्टि से यह परिभाषा आज भी अपना महत्त्वपूर्ण स्थान बनाये हुए है।

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